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रघुवंशम् • अध्याय 17 • श्लोक 43
वयोरूपविभूतीनामेकैकं मदकारणम् । तानि तस्मिन्समस्तानि न तस्योत्सिचिषे मनः॥
युवा अवस्था, रूप और वैभव — ये सभी अहंकार के कारण होते हैं, परंतु उसके पास ये सब होते हुए भी उसका मन अहंकार से रहित था।
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