मुख्य पृष्ठ शास्त्र परिचय ऐप इंस्टॉल करें
रघुवंशम् • अध्याय 17 • श्लोक 26
नेपथ्यदर्शिनश्छाया तस्यादर्शे हिरण्मये । विरराजोदिते सूर्ये मरौ कल्पतरोरिव॥
उसका प्रतिबिम्ब स्वर्ण दर्पण में ऐसा चमक रहा था जैसे मरुभूमि में उगता हुआ कल्पवृक्ष सूर्य के प्रकाश में चमकता है।
पूरा ग्रंथ पढ़ें
रघुवंशम् के सभी अध्याय और श्लोकों को उनके अर्थ और व्याख्या सहित पढ़ने के लिए Krishjan ऐप इंस्टॉल करें। ऐप में आपको संरचित अध्याय, आसान नेविगेशन और ऑफलाइन पढ़ने की सुविधा मिलती है।

सभी अध्याय उपलब्ध

रघुवंशम् के 18 अध्याय और सभी श्लोक एक ही स्थान पर।

सरल अर्थ

प्रत्येक श्लोक के साथ स्पष्ट हिंदी अनुवाद।

ऑफलाइन पढ़ें

इंटरनेट के बिना भी ग्रंथ पढ़ें।
Krishjan
धर्म का अन्वेषण
ऐप इंस्टॉल करें