आमुक्ताभरणः स्रग्वी हंसचिह्नदुकूलवान् । आसीदतिशयप्रेक्ष्यः स राज्यश्रीवधूवरः॥
आभूषणों से सुसज्जित, मालाओं से युक्त और हंसचिह्न वाले वस्त्र पहने हुए वह राजा अत्यन्त आकर्षक लग रहा था।
पूरा ग्रंथ पढ़ें
रघुवंशम् के सभी अध्याय और श्लोकों को उनके अर्थ और व्याख्या सहित पढ़ने के लिए Krishjan ऐप इंस्टॉल करें। ऐप में आपको संरचित अध्याय, आसान नेविगेशन और ऑफलाइन पढ़ने की सुविधा मिलती है।
सभी अध्याय उपलब्ध
रघुवंशम् के 18 अध्याय और सभी श्लोक एक ही स्थान पर।