चन्दनेनाङ्गरागं च मृगनाभिसुगन्धिना । समापय्य ततश्चक्रुः पत्रं विन्यस्तरोचनम्॥
चंदन और कस्तूरी की सुगंध से शरीर का श्रृंगार करके उन्होंने रोचन से तिलक लगाया।
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