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रघुवंशम् • अध्याय 17 • श्लोक 21
ततः कक्ष्यान्तरन्यस्तं गजदन्तासनं शुचि । सूत्तरच्छदमध्यास्त नेपथ्यग्रहणाय सः॥
फिर वह भीतर रखे हुए स्वच्छ हस्तीदंत के आसन पर बैठकर वस्त्राभूषण धारण करने लगा।
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