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रघुवंशम् • अध्याय 17 • श्लोक 11
नदद्भिः स्निग्धगंभीरं तूर्यैराहतपुष्करैः । अन्वमीयत कल्याणं तस्याविच्छिन्नसंतति॥
मधुर और गम्भीर ध्वनि वाले वाद्यों तथा नगाड़ों के नाद से उसकी अखण्ड वंशपरंपरा का मंगल सूचित हुआ।
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