मुख्य पृष्ठ शास्त्र परिचय ऐप इंस्टॉल करें
रघुवंशम् • अध्याय 16 • श्लोक 9
तमब्रवीत्सा गुरुणानवद्या या नीतपौरा स्वपदोन्मुखेन । तस्याः पुरः संप्रति वीतनाथां जानीहि राजन्नधिदेवतां माम् ॥
उसने उत्तर दिया — हे राजन्, मैं वही अधिदेवता हूँ, जो पहले अपने नगरवासियों को उनके स्थान तक पहुँचाने वाली और निर्दोष थी, पर अब तुम्हारे सामने निराश्रित खड़ी हूँ।
पूरा ग्रंथ पढ़ें
रघुवंशम् के सभी अध्याय और श्लोकों को उनके अर्थ और व्याख्या सहित पढ़ने के लिए Krishjan ऐप इंस्टॉल करें। ऐप में आपको संरचित अध्याय, आसान नेविगेशन और ऑफलाइन पढ़ने की सुविधा मिलती है।

सभी अध्याय उपलब्ध

रघुवंशम् के 18 अध्याय और सभी श्लोक एक ही स्थान पर।

सरल अर्थ

प्रत्येक श्लोक के साथ स्पष्ट हिंदी अनुवाद।

ऑफलाइन पढ़ें

इंटरनेट के बिना भी ग्रंथ पढ़ें।
Krishjan
धर्म का अन्वेषण
ऐप इंस्टॉल करें