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रघुवंशम् • अध्याय 16 • श्लोक 86
इत्यूचिवानुपहृताभरणः क्षितीशं श्लाघ्यू भवान्स्वजन इत्यनुभाषितारम् । संयोजयां विधिवदास समेतबन्धुः कन्यामयेन कुमुदः कुलभूषणेन ॥
इस प्रकार आभूषण लौटाकर और राजा की प्रशंसा सुनकर, कुमुद ने अपने बन्धुओं सहित अपनी कन्या का विधिपूर्वक विवाह कर दिया।
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