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रघुवंशम् • अध्याय 16 • श्लोक 77
ततः स कृत्वा धनुराततज्यं धनुर्धरः कोपविलोहिताक्षः । गारुत्मतं तीरगतस्तरस्वी भुजंगनाशाय समाददेऽस्त्रम् ॥
तब वह क्रोधित होकर धनुष चढ़ाकर, नागों के नाश के लिए गरुड़ास्त्र धारण कर तट पर खड़ा हुआ।
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