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रघुवंशम् • अध्याय 16 • श्लोक 7
लब्धान्तरा सावरणेऽपि गेहे योगप्रभावो न च लक्ष्यते ते । बिभर्षि चाकारमनिर्वृतानां मृणालिनी हैममिवोपरागम् ॥
बंद घर में प्रवेश करने पर भी तुम्हारे योगबल का पता नहीं चलता, और तुम ऐसे रूप को धारण किए हो जैसे कमलिनी पर स्वर्ण का आभास हो।
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