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रघुवंशम् • अध्याय 16 • श्लोक 65
संदष्टवस्त्रेष्वबलानितम्बेष्विन्दुप्रकाशान्तरितोडुतुल्याः । अमी जलापूरितसूत्रमार्गा मौनं भजन्ते रशनाकलापाः ॥
भीगे वस्त्रों से ढके स्त्रियों के नितम्बों पर, चन्द्रमा के प्रकाश से छिपे तारों जैसे, जल से भरे हुए कमरबंद के सूत्र मौन हो गए हैं।
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