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रघुवंशम् • अध्याय 16 • श्लोक 61
अमी शिरीषप्रसवावतंसाः प्रभ्रंशिनो वारिविहारिणीनाम् । पारिप्लवाः स्रोतसि निम्नगायाः शैवाललोलांश्छलयन्ति मीनान् ॥
जल में क्रीड़ा करती स्त्रियों के कानों से गिरे हुए शिरीष पुष्प जलधारा में बहते हुए काई के समान प्रतीत होकर मछलियों को भ्रमित करते हैं।
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