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रघुवंशम् • अध्याय 16 • श्लोक 54
अथोर्मिलोलोन्मदराजहंसे रोधोलतापुष्पवहे सरय्वाः । विहर्तुमिच्छा वनितासखस्य तस्याम्भसि ग्रीष्मसुखे बभूव ॥
फिर तरंगों में खेलते हुए और पुष्पों से भरे सरयू के तट पर, स्त्रियों के साथ उस जल में विहार करने की इच्छा उत्पन्न हुई।
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