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रघुवंशम् • अध्याय 16 • श्लोक 47
वनेषु सायंतनमल्लिकानां विजृम्भणोद्गन्धिषु कुड्मलेषु । प्रत्येकनिक्षिप्तपदः सशब्दं संख्यामिवैषां भ्रमरश्चकार ॥
वनों में संध्या समय खिलने वाली मल्लिकाओं की सुगंधित कलियों पर बैठते हुए भौंरे प्रत्येक पर जाकर मानो उनकी गणना करते थे।
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