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रघुवंशम् • अध्याय 16 • श्लोक 43
अथास्य रत्नग्रथितोत्तरीयमेकान्तपाण्डुस्तनलम्बिहारम् । निःश्वासहार्यांशुकमाजगाम घर्मः प्रियावेशमिवोपदेष्टुम् ॥
तब उसके पास ऐसा ग्रीष्म आया जो रत्नजटित वस्त्रों और श्वेत हारों को मानो प्रिया के वस्त्र की तरह उतार लेने का संकेत देता हुआ प्रतीत हुआ।
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