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रघुवंशम् • अध्याय 16 • श्लोक 41
सा मन्दुरासंश्रयिभिस्तुरंगैः शालाविधिस्तम्भगतैश्च नागैः । पूराबभासे विपणिस्थपण्या सर्वाङ्गनद्धाभरणेव नारी ॥
घोड़ों से भरे अस्तबलों और शालाओं में खड़े हाथियों से युक्त वह नगरी बाजारों में सजी वस्तुओं के साथ ऐसी शोभित हो रही थी मानो आभूषणों से सुसज्जित स्त्री हो।
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