अथोपशल्ये रिपुमग्नशल्यस्तस्याः पुरः पौरसखा स राजा । कुलध्वजस्तानि चलध्वजानि निवेशयामास बली बलानि ॥
तब शत्रुओं के शल्य से मुक्त हुआ वह राजा नगर के सामने अपने बलवान सैनिकों को ध्वजों सहित व्यवस्थित करने लगा।
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