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रघुवंशम् • अध्याय 16 • श्लोक 36
आधूय शाखाः कुसुमद्रुमाणां स्पृष्ट्वा च शीतान्सरयूतरंगान् । तं क्लान्तसैन्यं कुलराजधान्याः प्रत्युज्जगामोपवनान्तवायुः ॥
फूलों से भरे वृक्षों की डालियाँ हिलाते हुए और सरयू की शीतल तरंगों को स्पर्श करते हुए, उपवनों की वायु उस थकी हुई सेना का स्वागत करने आई।
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