मार्ग खोजती हुई वह सेना विन्ध्य के बीच-बीच में विभाजित होकर ऐसी गर्जना कर रही थी कि गुफाओं के मुख प्रतिध्वनि से भर गए, जैसे रेवा नदी का प्रबल प्रवाह।
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