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रघुवंशम् • अध्याय 16 • श्लोक 2
ते सेतुवार्तागजबन्धमुखैरभ्युच्छ्रिताः कर्मभिरप्यवन्ध्यैः । अन्योन्यदेशप्रविभागसीमां वेलां समुद्रा इव न व्यतीयुः ॥
वे अपने श्रेष्ठ कर्मों से ऊँचे उठे हुए होकर भी, समुद्रों की तरह अपनी-अपनी सीमाओं का उल्लंघन नहीं करते थे।
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