कालान्तरश्यामसुधेषु नक्तमितस्ततो रूढतृणाङ्कुरेषु । त एव मुक्तागुणशुद्धयोऽपि हर्म्येषु मूर्च्छन्ति न चन्द्रपादाः ॥
समय के साथ काले पड़े भवनों में, जहाँ-तहाँ उगे हुए घास के बीच, चन्द्रमा की शुद्ध किरणें भी अब पहले जैसी चमक नहीं दिखातीं।
पूरा ग्रंथ पढ़ें
रघुवंशम् के सभी अध्याय और श्लोकों को उनके अर्थ और व्याख्या सहित पढ़ने के लिए Krishjan ऐप इंस्टॉल करें। ऐप में आपको संरचित अध्याय, आसान नेविगेशन और ऑफलाइन पढ़ने की सुविधा मिलती है।
सभी अध्याय उपलब्ध
रघुवंशम् के 18 अध्याय और सभी श्लोक एक ही स्थान पर।