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रघुवंशम् • अध्याय 16 • श्लोक 16
चित्रद्विपाः पद्मवनावतीर्णाः करेणुभिर्दत्तमृणालभङ्गाः । नखाङ्कुशाघातविभिन्नकुम्भाः संरब्धसिंहप्रहृतं वहन्ति ॥
सुन्दर हाथी, जो पहले कमलवनों में जाकर हथिनियों से मृणाल प्राप्त करते थे, अब सिंहों के आक्रमण से घायल होकर अपने फटे हुए मस्तक लेकर घूमते हैं।
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