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रघुवंशम् • अध्याय 16 • श्लोक 15
सूपानमार्गेषु च येषु रामा निक्षिप्तवत्यश्चरणान्सरागान् । सद्योहतन्यङ्कुभिरस्रदिग्धं व्याघ्रैः पदं तेषु निधीयते मे ॥
जहाँ सीता ने अपने कोमल और लालिमा युक्त चरण रखे थे, उन्हीं मार्गों पर अब ताजे शिकार के रक्त से सने हुए व्याघ्रों के पदचिह्न दिखाई देते हैं।
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