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रघुवंशम् • अध्याय 16 • श्लोक 14
वृक्षेशया यष्टिनिवासभङ्गान्मृदङ्गशब्दापगमादलास्याः । प्राप्ता दवोल्काहतशेषबर्ह्याः क्रीडामयूरा वनबर्हिणत्वम् ॥
वृक्षों पर रहने वाले और मृदंग की ध्वनि के अभाव से नृत्य छोड़ चुके मोर, जिनके पंख अग्नि से झुलस गए हैं, अब वन के साधारण पक्षी बन गए हैं।
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