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रघुवंशम् • अध्याय 16 • श्लोक 12
निशासु भास्वत्कलनूपुराणां यः संचरोऽभूदभिसारिकाणाम् । नदन्मुखोल्काविचितामिषाभिः स वाह्यते राजपथः शिवाभिः ॥
रातों में जहाँ अभिसारिकाओं के नूपुरों की मधुर ध्वनि गूँजती थी, वही राजपथ अब मुँह से ज्वाला फेंकने वाली भयानक पशुओं की आवाजों से भर गया है।
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