विशीर्णतल्पाट्टशतो निवेशः पर्यस्तसालः प्रभुणा विना मे । विडम्बयत्यस्तनिमग्नसूर्यं दिनान्तमुग्रानिलभिन्नमेघम् ॥
मेरे भवनों में बिछौनों के वस्त्र फटे पड़े हैं, द्वार गिर चुके हैं, और स्वामी के बिना वे ऐसे प्रतीत होते हैं जैसे अस्त होते सूर्य के समय तेज वायु से बिखरे हुए बादल।
पूरा ग्रंथ पढ़ें
रघुवंशम् के सभी अध्याय और श्लोकों को उनके अर्थ और व्याख्या सहित पढ़ने के लिए Krishjan ऐप इंस्टॉल करें। ऐप में आपको संरचित अध्याय, आसान नेविगेशन और ऑफलाइन पढ़ने की सुविधा मिलती है।
सभी अध्याय उपलब्ध
रघुवंशम् के 18 अध्याय और सभी श्लोक एक ही स्थान पर।