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रघुवंशम् • अध्याय 16 • श्लोक 10
वस्वौकसारामभिभूय साहं सौराज्यबद्धोत्सवया विभूत्या । समग्रशक्तौ त्वयि सूर्यवंश्ये सति प्रपन्ना करुणामवस्थाम् ॥
मैंने पहले स्वर्गिक ऐश्वर्य को भी पराजित कर राजवैभव से उत्सवमयी स्थिति पाई थी, पर अब तुम जैसे समर्थ सूर्यवंशी के होते हुए भी मैं दयनीय अवस्था को प्राप्त हो गई हूँ।
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