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रघुवंशम् • अध्याय 15 • श्लोक 93
तथेति प्रतिपन्नाय विवृतात्मा नृपाय सः । आचख्यौ दिवमध्यास्व शासनात्परमेष्ठिनः॥
राजा के सहमत होने पर उसने अपना वास्तविक स्वरूप प्रकट कर परमेष्ठी की आज्ञा से स्वर्ग गमन का संदेश सुनाया।
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