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रघुवंशम् • अध्याय 15 • श्लोक 85
धरायां तस्य संरम्भं सीताप्रत्यर्पणैषिणः । गुरुर्विधिबलापेक्षी शमयामास धन्विनः॥
सीता को वापस पाने की इच्छा से उत्पन्न उसके क्रोध को, विधि के बल पर निर्भर गुरु ने शांत कर दिया।
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