एवमुक्ते तया साध्व्या रन्ध्रात्सद्योभवाद्भुवः । शातह्रदमिव ज्योतिः प्रभामण्डलमुद्ययौ॥
उस साध्वी के ऐसा कहते ही पृथ्वी से तुरंत एक प्रकाशमंडल प्रकट हुआ, जैसे किसी गहरे जलाशय से तेज निकलता है।
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