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रघुवंशम् • अध्याय 15 • श्लोक 74
इति प्रतिश्रुते राज्ञा जानकीमाश्रमान्मुनिः । शिष्यैरानाययामास स्वसिद्धिं नियमैरिव॥
राजा के इस वचन को स्वीकार करने पर मुनि ने जानकी को आश्रम से अपने शिष्यों द्वारा ऐसे बुलवाया मानो अपने सिद्ध तप को ही प्रस्तुत कर रहे हों।
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