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रघुवंशम् • अध्याय 15 • श्लोक 72
तात शुद्धा समक्षं नः स्नुषा ते जातवेदसि । दौरात्म्याद्रक्षसस्तां तु नात्रत्याः श्रद्दधुः प्रजाः॥
हे पुत्र, तुम्हारी पुत्रवधू हमारे सामने अग्नि में शुद्ध सिद्ध हुई थी, किन्तु राक्षस की दुष्टता के कारण यहाँ की प्रजा उस पर विश्वास नहीं कर सकी।
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