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रघुवंशम् • अध्याय 15 • श्लोक 66
तद्गीतश्रवणैकाग्रा संसदश्रुमुखी बभौ । हिमनिष्यन्दिनी प्रातर्निर्वातेव वनस्थली॥
उनके गीत को सुनते हुए सभा एकाग्र होकर अश्रुपूर्ण हो गई, जैसे प्रातःकाल में हिम से भीगी हुई शांत वनस्थली होती है।
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