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रघुवंशम् • अध्याय 15 • श्लोक 55
कुम्भयोनिरलंकारं तस्मै दिव्यपरिग्रहम् । ददौ दत्तं समुद्रेण पीतेनेवात्मनिष्क्रयम्॥
कुम्भयोनि अगस्त्य ने उसे दिव्य आभूषण दिया, मानो समुद्र ने स्वयं पीकर उसका मूल्य चुका दिया हो।
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