ते रामाय वधोपायमाचख्युर्विबुधद्विषः । दुर्जयो लवणः शूली विशूलः प्रार्थ्यतामिति॥
उन्होंने राम को देवताओं के शत्रु लवण के वध का उपाय बताया कि वह अत्यन्त दुर्जेय है, इसलिए उसके शूल के बिना ही उसे मारने का अवसर खोजा जाए।
पूरा ग्रंथ पढ़ें
रघुवंशम् के सभी अध्याय और श्लोकों को उनके अर्थ और व्याख्या सहित पढ़ने के लिए Krishjan ऐप इंस्टॉल करें। ऐप में आपको संरचित अध्याय, आसान नेविगेशन और ऑफलाइन पढ़ने की सुविधा मिलती है।
सभी अध्याय उपलब्ध
रघुवंशम् के 18 अध्याय और सभी श्लोक एक ही स्थान पर।