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रघुवंशम् • अध्याय 15 • श्लोक 40
तमभ्यनन्दत्प्रणतं लवणान्तकमग्रजः । कालनेमिवधात्प्रीतस्तुराषाडिव शार्ङ्गिणम्॥
लवण का वध करने वाले उसके सामने झुके हुए शत्रुघ्न का अग्रज राम ने वैसे ही स्वागत किया जैसे कालनेमि के वध से प्रसन्न इन्द्र ने विष्णु का किया था।
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