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रघुवंशम् • अध्याय 15 • श्लोक 4
प्रतिशुश्राव काकुत्स्थस्तेभ्यो विघ्नप्रतिक्रियाम् । धर्मसंरक्षणार्थेव प्रवृत्तिर्भुवि शार्ङ्गिणः॥
काकुत्स्थ राम ने उनसे विघ्न के निवारण का उपाय सुना, क्योंकि इस पृथ्वी पर उनका कार्य धर्म की रक्षा करना ही था।
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