सखा दशरथस्यापि जनकस्य च मन्त्रकृत् । संचस्कारोभयप्रीत्या मैथिलेयौ यथाविधि॥
दशरथ और जनक दोनों के मित्र तथा मन्त्री उस ऋषि ने प्रसन्न होकर मैथिली के दोनों पुत्रों का विधिपूर्वक संस्कार किया।
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