या सौराज्यप्रकाशाभिर्बभौ पौरविभूतिभिः । स्वर्गाभिष्यन्दवमनं कृत्वेवोपनिवेशिता॥
वह नगरी उत्तम शासन की ज्योति और नागरिक समृद्धि से ऐसी शोभित हुई मानो स्वर्ग की विभूतियों को पृथ्वी पर उतार दिया गया हो।
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