सौमित्रेर्निशितैर्बाणैरन्तरा शकलीकृतः । गात्रं पुष्परजः प्राप न शाखी नैरृतेरितः॥
लक्ष्मण के तीखे बाणों से वह वृक्ष बीच में ही टुकड़े-टुकड़े हो गया और उसका शरीर पुष्परज के समान बिखर गया, राक्षस के हाथ तक नहीं पहुँच सका।
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