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रघुवंशम् • अध्याय 14 • श्लोक 81
ता इङ्गुदीस्नेहकृतप्रदीपमास्तीर्णमेध्याजिनतल्पमन्तः । तस्यै सपर्यानुपदं दिनान्ते निवासहेतोरुटजं वितेरुः ॥
तपस्विनियों ने इंगुदी तेल से बने दीपक से प्रकाशित, पवित्र मृगचर्म से बिछाए हुए आसन सहित उस कुटी को दिन के अंत में सेवा सहित उसके निवास के लिए तैयार किया।
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