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रघुवंशम् • अध्याय 14 • श्लोक 78
पयोघटैराश्रमबालवृक्षान्संवर्धयन्ती स्वबलानुरूपैः । असंशयं प्राक्तनयोपपत्तेः स्तनंधयप्रीतिमवाप्स्यसि त्वम्॥
आश्रम के छोटे-छोटे वृक्षों को अपने सामर्थ्य के अनुसार जल देकर बढ़ाते हुए तुम निश्चय ही अपने पूर्व संस्कारों के कारण मातृत्व का सुख प्राप्त करोगी।
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