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रघुवंशम् • अध्याय 14 • श्लोक 77
पुष्पं फलं चार्तवमाहरन्त्यो बीजं च बालेयमकृष्टरोहि । विनोदयिष्यन्ति नवाभिषङ्गामुदारवाचो मुनिकन्यकास्त्वाम्॥
फूल, फल और कंद-मूल लाने वाली तथा बिना जोते उगने वाले अन्न के बीजों से युक्त मुनिकन्याएँ अपनी मधुर वाणी से तुम्हारा मन बहलाएँगी।
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