मुख्य पृष्ठ शास्त्र परिचय ऐप इंस्टॉल करें
रघुवंशम् • अध्याय 14 • श्लोक 75
तपस्विसंसर्गविनीतसत्त्वे तपोवने वीतभया वसास्मिन् । इतो भविष्यत्यनघप्रसूतेरपत्यसंस्कारमयोविधिस्ते॥
तपस्वियों के संग से विनीत चित्त वाली तुम इस तपोवन में निर्भय होकर निवास करो; यहाँ तुम्हारे निष्पाप प्रसव के लिए संतान के संस्कारों का विधि-विधान सम्पन्न होगा।
पूरा ग्रंथ पढ़ें
रघुवंशम् के सभी अध्याय और श्लोकों को उनके अर्थ और व्याख्या सहित पढ़ने के लिए Krishjan ऐप इंस्टॉल करें। ऐप में आपको संरचित अध्याय, आसान नेविगेशन और ऑफलाइन पढ़ने की सुविधा मिलती है।

सभी अध्याय उपलब्ध

रघुवंशम् के 18 अध्याय और सभी श्लोक एक ही स्थान पर।

सरल अर्थ

प्रत्येक श्लोक के साथ स्पष्ट हिंदी अनुवाद।

ऑफलाइन पढ़ें

इंटरनेट के बिना भी ग्रंथ पढ़ें।
Krishjan
धर्म का अन्वेषण
ऐप इंस्टॉल करें