साहं तपः सूर्यनिविष्टदृष्टिरूर्ध्वं प्रसूतेश्चरितुं यतिष्ये । भूयो यथा मे जननान्तरेऽपि त्वमेव भर्ता न च विप्रयोगः॥
इसलिए मैं सूर्य पर दृष्टि स्थिर कर कठोर तप करने का प्रयत्न करूँगी, ताकि अगले जन्म में भी तुम ही मेरे पति बनो और फिर कभी वियोग न हो।
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