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रघुवंशम् • अध्याय 14 • श्लोक 65
किंवा तवात्यन्तवियोगमोघे कुर्यामुपेक्षां हतजीवितेऽस्मिन् । स्याद्रक्षणीयं यदि मे न तेजस्तदीयमन्तर्गतमन्तरायः॥
या फिर तुम्हारे पूर्ण वियोग से निष्फल हो चुके इस जीवन को मैं कैसे उपेक्षित कर दूँ; यदि मेरा तेज सुरक्षित न रहे तो वही भीतर से बाधा बन जाएगा।
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