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रघुवंशम् • अध्याय 14 • श्लोक 62
कल्याणबुद्धेरथवा तवायं न कामचारो मयि शङ्कनीयः । ममैव जन्मान्तरपातकानां विपाकविस्फूर्जिथुरप्रसह्यः॥
या फिर तुम्हारी कल्याणकारी बुद्धि में मेरे प्रति कोई दोष नहीं समझना चाहिए, यह तो मेरे ही पूर्वजन्म के पापों का असह्य फल है जो प्रकट हुआ है।
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