ततोऽभिषङ्गानिलविप्रविद्धा प्रभ्रश्यमानाभरणप्रसूना । स्वमूर्तिलाभप्रकृतिं धरित्रीं लतेव सीता सहसा जगाम॥
उसके बाद आघात रूपी वायु से विचलित होकर, आभूषणों और पुष्पों से रहित होती हुई सीता लता के समान भूमि पर गिर पड़ी।
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