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रघुवंशम् • अध्याय 14 • श्लोक 45
प्रजावती दोहदशंसिनी ते तपोवनेषु स्पृहयालुरेव । स त्वं रथी तद्व्यपदेशनेयां प्रापय्य वाल्मीकिपदं त्यजैनाम्॥
तुम्हारी गर्भवती पत्नी तपोवनों में जाने की इच्छा व्यक्त कर रही है; अतः तुम उसे उस बहाने रथ पर बैठाकर वाल्मीकि के आश्रम तक ले जाकर वहीं छोड़ आओ।
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