जनक की पुत्री के प्रति अत्यन्त कठोर निश्चय प्रकट करने वाले उस स्वामी को सुनकर, उन भाइयों में से कोई भी न तो उसे रोक सका और न ही उसकी अनुमति दे सका।
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