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रघुवंशम् • अध्याय 14 • श्लोक 43
इत्युक्तवन्तं जनकात्मजायां नितान्तरूक्षाभिनिवेशमीशम् । न कश्चन भ्रातृषु तेषु शक्तो निषेद्धुमासीदनुमोदितुं वा॥
जनक की पुत्री के प्रति अत्यन्त कठोर निश्चय प्रकट करने वाले उस स्वामी को सुनकर, उन भाइयों में से कोई भी न तो उसे रोक सका और न ही उसकी अनुमति दे सका।
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